जब मैं ने आप के लहज़े में ख़ुशी देखी
तो सब ही ने मिरे चहरे पर हँसी देखी
सब क़ामयाबी में ज़िन्दगी को देखें है
पर उस से बहस में मैं ने ज़िन्दगी देखी
है इश्क़ उन को भी और दूर रहना है
उन आँखों में ये करते मैं ने नमी देखी
आँखें मिरी तिरे चेहरे से हटे कैसे
चेहरे पे चाँद की पूरी चाँदनी देखी
बस नाम तेरा बस नाम तेरा बस तेरा
इस नाम पे मैं ने पूरी ज़िंदगी देखी
सब से बड़ी ख़ुशी तब पता चली मुझ को
जब मैं ने उस की आँखों में शा'इरी देखी
इक बार के लिए रब भी हो गया हैरान
कुछ ऐसी "दीप" की जब दिवानगी देखी
— Deep kamal panecha















