
मेरे ज़ख़्म चीख़ के बताते हाल हैं उन्हें
अपने कान से नहीं जो अपने दिल से बहरे हैं
खोल देता हूँ मैं उन के आगे अपने सारे राज
पर उन्हें तो लगता हैं ये सारे मेरे चेहरे हैं
— Deep kamal panecha
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