जुगनूँ ताना मार रहे हैं
सूरज को ललकार रहे हैं
हम को दोस्त बचाने हैं सो
हम हर बाज़ी हार रहे हैं
आज जो तन्हा दिखते हैं ना
वो यारों के यार रहे हैं
कल को रस्ता हो जाएँगे
कल तक जो दीवार रहे हैं
मेरा आख़िरी इश्क़ है अब तू
हाँ पहले दो चार रहे हैं
— Mukesh Guniwal "MAhir"















