सारी ऐंठ अकड़ और ताप चले जाते हैं
वक़्त से पहले जब माँ बाप चले जाते हैं
रहने वालों को सब कुछ सहना होता है
जाने वाले तो चुप-चाप चले जाते हैं
मा'लूम है के उन के बिन जीना मुश्किल है
फिर भी जीवन का दे श्राप चले जाते हैं
बस कुछ दिन तक तो यादों में रहते हैं वो
फिर यादों से अपने आप चले जाते हैं
— Mukesh Guniwal "MAhir"















