मैं तुम्हारी दस्तरस से दूर हूँख़्वाब हूँ,आँखों के बस से दूर हूँइश्क़ ही से राबता रक्खा फ़क़तइस लिए अब तक हवस से दूर हूँहै गुमाँ अब भी मोहब्बत का उसेमैं मोहब्बत के क़फ़स से दूर हूँ— Prasoon