मेरे किरदार पे कुछ शख़्स अब सवाल करते हैं
कुछ सामने मिरे कुछ पीठ पीछे बवाल करते हैं
पहले जो कहा करते थे मैं लड़का कमाल हूँ
आशुफ्ता मुझे देख अब वो ही कमाल करते हैं
देता नहीं है आसरा अब कोई भी यहाँ पर
जीने लगूँ सुकून से तो फिर क्यूँँ धमाल करते हैं
आब-ए-चश्म निकले मगर पोंछे नहीं किसी ने
मुकम्मल अंजाम पे फिर क्यूँँ मलाल करते हैं
आफात मिरा ये कि दुश्मन भी मेरे अपने
अपनों को भला फिर क्यूँँ इतना हलाल करते हैं
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