हर कोई आया और आ कर चला गया

मुझ को तेरी याद दिला कर चला गया

सात जनम की क़स
में खाई थी जिस ने
दो दिन में ही हाथ छुड़ाकर चला गया

कल वो फिर से मेरे सपने में आया
फिर मुझ को एक ख़्वाब दिखा कर चला गया

मुझ को दिल का हाल सुनाना था उस को
वो घर के हालात सुनाकर चला गया

मुझ को लगता था मैं सब से अच्छा हूँ
आईना कोई दिखलाकर चला गया

वक़्त निकाला बेटे ने माँ के ख़ातिर
देख, चिता पर आग लगाकर चला गया

अपनी मौत का जशन मना ये देख 'ग़ुलाम'
वो भी आँसू चार बहाकर चला गया

— Ritik Bhatt 'ghulam'

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