
ज़माने की नज़र में वो बहुत बेकार होता है
जिसे भी ज़ात के बाहर किसीसे प्यार होता है
नहीं हिम्मत बग़ावत कर सके कोई ज़माने से
सो शादी के घरों में आज भी व्यापार होता है
— Ritik Bhatt 'ghulam'
Other sher from the same pen
Shers of beautiful mehndi.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling