इश्क़ में आज कल के लड़के
चाँद लाएँगे चल के लड़के
गर सही मोड़ पर न फिसले
क्या रहे फिर सँभल के लड़के
यूँ करो यूँ नहीं मोहब्बत
अब सिखाते हैं कल के लड़के
उस को लड़कों से ही बचाने
आए तो फिर निकल के लड़के
हाथ पकड़ा मेरा जो उस ने
रह गए सारे जल के लड़के
मेरे जैसे ही निकले पागल
उस ने देखे बदल के लड़के
इश्क़ का तो इ भी न आए
फ़ैन हैं पर ग़ज़ल के लड़के
उठ गई डोली भी गली से
चल दिए हाथ मल के लड़के
— Saket Gupta Saaki















