"सवाल"

तुम्हीं बताओ मैं कैसे तुम पर यक़ीन कर लूँ
तुम्हारे जैसी ही एक लड़की थी तुम से पहले
सदा जो हम से ये बोलती थी
बिना तुम्हारे न जी सकूँगी
यक़ीन कर लो ये बात सच है
क़सम ख़ुदा की मैं ख़ुद से ज़ियादा यक़ीन करती हूँ यार तुम पर
मैं जान दे दूँगी तुम जो कह दो कि जान दे दो
गुरेज़ बिल्कुल नहीं करूँगी
मैं मुस्कुरा कर ये जान दूँगी
यक़ीन कर लो ये बात सच है
मैं चाहती हूँ तुम्हें मैं ख़ुद से क़रीब कर लूँ
तुम्हें मैं अपना हबीब कर लूँ
अगर हो बस में मिरे तो तुम को मैं अपनी आँखों का नूर कर लूँ
तुम्हें मैं धड़कन बना लूँ दिल की तुम्हें मैं अपना हुज़ूर कर लूँ
यक़ीन कर लो ये बात सच है
बिना तुम्हारे न जी सकूँगी
मगर वो इक दिन क़रीब आई
क़रीब आ कर वो मुझ से बोली
मुआ'फ़ करना कि हम तुम्हारे न हो सकेंगे
तुम्हें न अपना बना सकेंगे
मुआ'फ़ करना
जो हम ने वादे किए थे तुम से वफ़ा नहीं कर सकेंगे उन को
मुआ'फ़ करना
तुम्हारे दिल को दुखा रहे हैं तुम्हें दग़ा दे के जा रहे हैं
हैं अपनी ग़लती पे दिल से नादिम
मुआ'फ़ कर दो
क़सम की ख़ुदा की ख़बर नहीं थी कि ऐसा होगा
कि अपने दोनों न मिल सकेंगे
क़सम ख़ुदा की यक़ीन कर लो तो तुम से वादे कभी न करते
कभी न कहते कि जान दे देंगे तुम जो कह दो
हबीब तुम को बनाएँगे हम कभी न कहते
कभी न कहते तुम्हें बना लेंगे दिल की धड़कन
क़सम की ख़ुदा की यक़ीन कर लो कि तुम से वादे कभी न करते
अगरचे हम को ख़बर ये होती
ज़माना हम पर सितम करेगा
हमें कभी भी न मिलने देगा
क़सम ख़ुदा की तो तुम से वादे कभी न करते
मुआ'फ़ करना हम आज तुम से बिछड़ रहे हैं
हमारा दिल तो नहीं हैं लेकिन ज़माने वाले ये चाहते हैं
गले लगाया ये हम से बोली
हमारे बस में नहीं है कुछ भी
मुआ'फ़ करना
हम अपने वादे निभा न पाए
तुम्हें हम अपना बना न पाए
हसीन आँखों में अश्क ला कर वो फिर ये बोली
अगर बुरा नईं लगे जो तुम को तो चंद बातें कहूँ मैं तुम से
तो मैं ये बोला
तुम्हें इजाज़त है जो भी चाहो वो हम से कह दो
तो रोके बोली
मैं चाहती हूँ बिछड़ के मुझ से सदा ही अपना ख़याल रखना
कभी न ख़ुद को निढाल करना
कभी न ख़ुद को उदास करना
हमारे ग़म में हसीन आँखों को मत भिगोना
हमारी फ़ुर्क़त में तुम न रोना
हमें ख़ुदा पर यक़ीं है पूरा
हर एक मुश्किल वो हल करेगा
तुम्हारे सारे ग़मों से तुम को नजात देगा
वो तुम को लंबी हयात देगा
वो रोके बोली
तुम्हारे हक़ में दुआ करूँगी
कोई भी मुश्किल तुम्हें न आए
बिछड़ के हम से तुम्हारे होंठों का ये तबस्सुम कभी न जाए
वो रोके बोली
मुआ'फ़ कर दो
मैं इस मुहब्बत के रास्ते पर मलाल है कि
तुम्हारे हमराह चल न पाई
मैं अपने वादे निभा न पाई
मुआ'फ़ कर दो
वो इतना कह कर जो चुप हुई तो मैं उस से बोला
यूँ राह में मुँह जो मोड़ती हो
हमें जो तुम ऐसे छोड़ती हो
हमारे ख़्वाबों को तोड़ती हो
करोगी ऐसा ख़बर नहीं थी
यक़ीन मानो ख़बर जो होती
तो तुम से हरगिज़ न दिल लगाते
यक़ीन मानो क़सम ख़ुदा की
तो तुम से हरगिज़ न दिल लगाते
चलो ये माज़ी की बात छोड़ो
सवाल करता हूँ तुम बताओ
तुम्हारी बातें हैं उस की जैसी
तुम्हारे वादे हैं उस के जैसे
तुम्हारा लहजा है उस के जैसा
हो यार तुम भी तो एक लड़की
मुझे बताओ मैं कैसे तुम पर यक़ीन कर लूँ
तुम्हीं बताओ मैं कैसे तुम पर यक़ीन कर लूँ

— Shajar Abbas

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