मैं जब रातों में अंबर देखता हूँ

सितारों का समुंदर देखता हूँ

नज़र आते थे जिन
में फूल कल तक
अब उन हाथों में पत्थर देखता हूँ

जो नामुमकिन हैं उन सपनों के पीछे
परेशाँ ख़ुद को अक्सर देखता हूँ

नज़र आती हैं लाशें ख़्वाहिशों की
मैं जब भी दिल के अंदर देखता हूँ

बुरा क्या है अगर संसार में मैं
सभी को इक बराबर देखता हूँ

सभी को एक सा दुनिया में 'गुलशन'
नहीं मिलता है अवसर देखता हूँ

— Gulshan

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