वैसे तो वो सब को सीधी लगती है
मुझ से पूछो तीखी मिर्ची लगती है
कुछ आँखों को पतझड़ अच्छा लगता है
इक लड़की ग़ुस्से में अच्छी लगती है
जब देखो सिर खाने लगती है मेरा
ये लड़की सदियों से भूखी लगती है
सबका ऊपर वाले से ये रोना है
अपनी चादर सब को छोटी लगती है
सब लड़के नइँ पटते यूँ इतराने से
हर गाड़ी में अपनी चाबी लगती है
— Vishal Rana















