jis ki awaaz kaanon men subh subh chidiyon ki tarah chahakti thii | जिस की आवाज़ कानों में सुब्ह सुब्ह चिड़ियों की तरह चहकती थी

  - Aamir Riaz
जिसकीआवाज़कानोंमेंसुब्हसुब्हचिड़ियोंकीतरहचहकतीथी
जिसकीमौजूदगीसेफ़ज़ाओंमेंख़ुशबूसीमहकतीथी
वोमेरीपहलीमोहब्बतथी
जिसकीआँखेंदेखमुतअस्सिरहोजातेथेहिरन
नक़ाबसेजिसकाचेहराऐसेझलकताथाजैसेसूरजकीपहलीकिरन
जिसकामुस्कुरानाथाकिजैसेवादियोंमेंसहरकाआना
किसीफूलकीतरहजिसपेतितलियाँमंडरायाकरतीथीं
वोचाँदसेआईथीशायदरातमेंसितारोंसेबातेंकियाकरतीथी
जोदिनकापहलापैग़ामभीथीऔररातकाआख़िरीसलामभी
सुब्ह-बा-ख़ैरसेलेकरशब-ब-ख़ैरतकजोमेरातकिया-कलामथी
वोमेरीपहलीमोहब्बतथी
ख़ामोशीमेंछुपाएजज़्बातजोसमझलेतीथी
बिनज़ाहिरकिएतमामएहसासातजोपरखलेतीथी
मेरेलिएजोहरकहानीहरएकक़िस्सेमेंथी
हरएकशाइ'रीहरएकग़ज़लकेहिस्सेमेंथी
जोहरनज़्ममेंथीऔरहरमौसीक़ीमेंभी
दिलदारभीथीजोऔरदुनिया-दारभी
शान-ओ-शौकतकीइसदुनियामेंमुझग़रीबकीचाहतकीतलबगारथी
वोमेरीपहलीमोहब्बतथी
जोमाज़ीथीमगरमेरामुस्तक़बिलबनपाई
मेरेसाथहरहालमेंराज़ीथीमगरज़िंदगीमेंशामिलहोपाई
प्यारकीराहमेंजोमेरीहम-सफ़रथी
जिसकेजानेकेबा'दमेरीज़िंदगीसिफ़रथी
कुछरिश्तेख़ूनकेहोतेहैंऔरकुछदिलके
मगररूहकारिश्तासिर्फ़जिसशख़्ससेथा
वोमेरीपहलीमोहब्बतथी
मेरेतख़य्युलमेंजोइकतस्वीरबनकेरहगई
जोदिलमेंमेरेबसकेतक़दीरमेंकिसीऔरकीहोगई
जोहमराज़भीथीऔरमेरीज़िंदगीकासबसेबड़ाराज़भी
जिसकेजानेकेमुद्दतोंबा'दभीउसकेवापसआनेकीएकआसथी
वोमेरीपहलीमोहब्बतथी
वोमेरीपहलीमोहब्बतथी
  - Aamir Riaz
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Mohabbat Shayari

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