हो जब तलक बे-नाम तुम
करना नहीं आराम तुम
गढ़ता है वो आँखों में तो
क्यूँ लेते उस का नाम तुम
नफ़रत के इस माहौल में
दो प्यार का पैग़ाम तुम
है स्वर्ग तुम को देखना
तो जाओ चारों धाम तुम
गिन कर के गुठली होगा क्या
चुप चाप खाओ आम तुम
रावण दिखे दोबारा तो
बन जाना झट से राम तुम
— Adarsh Akshar















