वो है भगवान वो पत्थर मैं नहीं रह सकता
वो किसी और के पैकर में नहीं रह सकता
धरती आकाश समय कुछ भी नहीं उस के लिए
वो किसी वक़्त-ए-मुक़र्रर में नहीं रह सकता
वो है ला-इंतिहा महबूस नहीं होगा वो
अक्स उस का किसी मंज़र में नहीं रह सकता
दिन का राजा हूँ उजाला है सिंघासन मेरा
मेरा दम घुटता है मैं घर में नहीं रह सकता
जितने धरती पे प्राणी हैं मैं हूँ उन से अलग
मैं हूँ इंसान मैं बंदर में नहीं रह सकता
अपने अंदर में कोई बोझ नहीं रखता 'सोज़'
शिव कोई जैसे समुंदर में नहीं रह सकता
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