तलाश कर मिरी बर्बादियों का हल बाबा
जो तू कहेगा करूँँगा वही अमल बाबा
तरह तरह के ये चोले न तू बदल बाबा
तुझे जो फ़ैसला करना है कर अटल बाबा
फ़क़ीर बन नहीं सकता तो ओढ़ कर कमली
ख़ुदी को दिल से मिटा नफ़्स को कुचल बाबा
नशे में ज़र के बहुत पगड़ियाँ उछाली हैं
ज़रूर तुझ को मिलेगा किए का फल बाबा
तिरी तलाश में दैर-ओ-हरम को छान लिया
कहाँ छुपा है तू आवाज़ दे निकल बाबा
फ़रेब-ए-हुस्न से वाक़िफ़ नहीं है तू सुन ले
डगर डगर है कठिन जाएगा फिसल बाबा
लगा है कौन सा ग़म तुझ को ये बता 'अह्मर'
उदास किस लिए रहता है आज-कल बाबा
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