मिरे वजूद में गिर्ये की ला-ज़वाली है
उदासियों ने मिरी दाग़-बेल डाली है
मुझे वफ़ाओं से गुंजान करने वाले पलट
पलट कि ख़ाना-ए-दिल याद से भी ख़ाली है
वो शख़्स काश कि अपना जवाब भी रखता
बिछड़ के जिस से मिरी ज़िन्दगी सवाली है
बिसात-ए-जाँ पे मिरा खेल इंहिमाक से देख
बहुत ही जल्द मिरी मात होने वाली है
बहुत से अस्ल ख़ुदा आज़मा चुका हूँ मैं
इसी सबब से तो मेरा ख़ुदा ख़याली है
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