बे-ख़बर हूँ होश का आलम नहीं
ये भी कुछ उस की इनायत कम नहीं
मेरे होंटों पर तबस्सुम देख कर
क्यूँ समझते हो कि दिल में ग़म नहीं
शान-ए-ग़म इस में नहीं आँसू बहें
क़हक़हे भी आँसुओं से कम नहीं
जल उठा है दिल में इक ऐसा चराग़
रौशनी जिस की कभी मद्धम नहीं
चश्म-ए-शाइर चश्म है नर्गिस नहीं
इस का हासिल ख़ून है शबनम नहीं
'ताहिरा' जिस में न हो सोज़-ए-दरूँ
सिर्फ़ इक हैवान है आदम नहीं
— Bano Tahira Sayeed















