आकाश पे दीप सितारों के

धरती पर फूल बहारों के
सब्ज़े पर शबनम के मोती
सावन की हवा ठंडी ठंडी
ये मेरे बिखरे सपने हैं

लहराते हुए बहते चश्में
चश्मों के नशात-आगीं नग़्में
कोहसार के रंगीं शाम-ओ-सहर
जंगल के हसीं दिलकश मंज़र
ये मेरे बिखरे सपने हैं

बिजली की कड़क बादल की गरज
ख़ूँ-बार शफ़क़ ढलता सूरज
महताब में नींद जवानी की
और ख़ुशबू रात की रानी की
ये मेरे बिखरे सपने हैं

दरिया साहिल कश्ती लंगर
हीरे मोती कंकर पत्थर
परियों के महल इन्दर की सभा
तीखी चितवन बाँका चेहरा
ये मेरे बिखरे सपने हैं

नज़्में ग़ज़लें आहें नग़्में
ख़ून-ए-जिगर कुछ दल के टुकड़े
भूली-बिसरी बीती बातें
ग़म की अनोखी सी सौग़ातें
ये मेरे बिखरे सपने हैं

— Bano Tahira Sayeed

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