किसी की आँख से आँसू चुराने थे

किसी की आँख में सपने बनाने थे

बड़ी मुश्किल से दुनिया को सुनाए यार
वो क़िस्से जो हमें तुम को सुनाने थे

ख़रीदारी की तो ऐसी, ले ली दुनिया
भले ही जेब में बस चार आने थे

पलट कर तक नहीं देखा कभी तू ने
के वादे से तो तेरे कॉल आने थे

तेरे पहलू में थी ये सीढ़िया सारी
हमारे हिस्से में साँपो के खाने थे

— Chandrajeet Regar

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Nigaah Shayari

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