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इक वो हैं कि वा'दा कोई ईफ़ा नहीं करते  - Dr. Naresh

इक वो हैं कि वा'दा कोई ईफ़ा नहीं करते
इक हम हैं कि उस का कोई शिकवा नहीं करते

उन का तो है दस्तूर भुला देते हैं सब को
हम उन को किसी हाल में भूला नहीं करते

रो रो के शब-ओ-रोज़ तिरे हिज्र में ऐ दोस्त
हम अपनी मोहब्बत का तमाशा नहीं करते

तुम जिन की निगाहों में समा जाते हो फिर वो
दुनिया की किसी शय की तमन्ना नहीं करते

आगाह-ए-रह-ओ-रस्म-ए-मोहब्बत हैं जो आशिक़
वो ख़ुद को फ़ुग़ाँ से कभी रुस्वा नहीं करते

है उन की ख़ुशी में ही 'नरेश' अपनी मसर्रत
हम अपने ग़म-ओ-दर्द की परवा नहीं करते

Dr. Naresh
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