लोग कहते हैं मिरी पेशानी पर ऐसा लिखा है
शा'इरी अपनी अमर कर और फिर मरना लिखा है
बा'द जाने के ज़रा भी तू ने तो सोचा न होगा
डाइरी में अपनी तेरे आने का नक़्शा लिखा है
चाँदनी उस रात में जब लौट आएगी तू वापस
तब सुनाऊँगा तुझे वो जो मैं ने नग़्मा लिखा है
इक परिंदा जो क़फ़स में क़ैद है ये सोचता है
क्या मिरी क़िस्मत में भी आकाश में उड़ना लिखा है
उस की बातें इतनी मीठी थी कि मैं ने धोका खाया
फिर भी उस झूठे को अपनी ग़ज़लों में सच्चा लिखा है
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