साथ कश्ती के अचानक बादबाँ भी जल उठा
पानियों में डूबता साया मकाँ भी जल उठा
जिस परिंदे ने किया ता'मीर दे कर ख़ून-ए-दिल
बिजलियों की ज़द में उस का आशियाँ भी जल उठा
मेरा चेहरा माहताबी देख कर सूरज जला
और हद है चाँद जैसा राज़-दाँ भी जल उठा
— Fakhira batool
पानियों में डूबता साया मकाँ भी जल उठा
जिस परिंदे ने किया ता'मीर दे कर ख़ून-ए-दिल
बिजलियों की ज़द में उस का आशियाँ भी जल उठा
मेरा चेहरा माहताबी देख कर सूरज जला
और हद है चाँद जैसा राज़-दाँ भी जल उठा
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