इश्क़ पागल कर गया तो क्या करोगे सोच लो

सानेहा ऐसा हुआ तो क्या करोगे सोच लो

साथ उस के हर क़दम चलने की आदत किस लिए
छोड़ कर वो चल दिया तो क्या करोगे सोच लो

शोर बाहर है अभी इस वास्ते ख़ामोश हो
शोर अंदर से उठा तो क्या करोगे सोच लो

कर रहे हो घर नया ता'मीर उड़ती रेत पर
ये अचानक गिर गया तो क्या करोगे सोच लो

लौट कर जाना तो है आख़िर सभी को उस तरफ़
सौ बरस भी जी लिया तो क्या करोगे सोच लो

धड़कनें मद्धम हुई जाती हैं ऐ चारागरो
चाक दिल का सिल गया तो क्या करोगे सोच लो

बंद पलकों में अधूरे ख़्वाब बनते हो मगर
कोई इन में आ बसा तो क्या करोगे सोच लो

दर दरीचे सब मुक़फ़्फ़ल कर के बैठे हो मगर
वो अचानक आ गया तो क्या करोगे सोच लो

डूबते सूरज का चेहरा और उस का नक़्श-ए-पा
जब ये मंज़र गुम हुआ तो क्या करोगे सोच लो

— Fakhira batool

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