तुम्हारी नज़रें यूँँ बर्क़ दिल पे गिरा रही हैं
कि सोई सोई सी धड़कनों को जगा रही हैं
दिया मोहब्बत का मेरे सीने में जल रहा है
ये चाहतें दिल से तीरगी को मिटा रही हैं
सुनो न ऐसी नशीली नज़रों से मुझ को देखो
तुम्हारी नज़रें ये तीर हम पे चला रही हैं
हक़ीक़तन अब तो अपनी बाँहों को दो इजाज़त
कि ये तसव्वुर में मुझ को सीने लगा रही हैं
चलो चलें मिल के हम मोहब्बत के गीत गाएँ
सुहाने मौसम की ये फ़ज़ाएँ भी गा रही हैं
क़रीब आओ तुम्हारे होंटों को चूम लूँ मैं
ये दूरियाँ अब तो बे-क़रारी बढ़ा रही हैं
लबों को जुम्बिश ज़रा सा कर दो कि आज 'हैदर'
तड़प रहा है ये उस की आँखें बता रही हैं
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