ajeeb baat thii har she'r pur-asar thehra | अजीब बात थी हर शे'र पुर-असर ठहरा

  - Jafar Abbas
अजीबबातथीहरशे'रपुर-असरठहरा
मैंइसकीबज़्ममेंकलरातबा-हुनरठहरा
हुआजोकेवोमेहमानबा'दमुद्दतके
लहूँमेंरक़्सहुआबामपरक़मरठहरा
मुमानअ'तकातक़ाज़ाथाजिससेदूररहें
चमनमेंवोहीशजरसबसेबा-समरठहरा
जुनूँकीभीककहींभीमिलसकीउसको
गदा-ए-होशयहाँगरचेदर-ब-दरठहरा
अजीबरक़्सथाबिस्मिलकाहरतमाशाई
तड़पकेदर्दसेयकसरहीबे-ख़बरठहरा
अक़ीदतोंकेधुँदलकोंमेंऔरक्याहोता
हरएकफ़िक़रायहाँउसकामो'तबरठहरा
मुझेक़त्लकरेंबसपयामलायाहूँ
मिरीहक़ीक़तहीक्यामैंतोनामा-बरठहरा
सफ़ीनागरचेकिनारेपेजालगालेकिन
सवालयेहैइधरठहरायाउधरठहरा
जानेकितनीहीसम्तेंबुलारहीहैंमुझे
हरइकक़दमपेहैमुझकोनयासफ़रठहरा
देखपायाकोईआँख-भरकेआईना
ख़ुदअपनाचेहरायहाँबाइ'स-ए-मफ़रठहरा
ठहरकेजिसनेभीकुछदेरख़ुदकोदेखलिया
वोअपनीवहशत-ए-बे-जाकाचारा-गरठहरा
हैजानेकितनेहीपर्दोंमेंमहव-ए-आराइश
झलकभीदेखलीजिसनेवोदीदा-वरठहरा
हरएकशयसेमोहब्बतहैबसइलाजयहाँ
बसएकनुस्ख़ायहीहैजोकार-गरठहरा
शुरूअ'हुआथाअभीऔरक़रीबख़त्महैअब
येज़िंदगीकासफ़रकितनामुख़्तसरठहरा
  - Jafar Abbas
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Mehman Shayari

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