हरशयजहाँकीगर्द-ओ-ग़ुबार-ए-ख़यालहै
आशोब-गाह-ए-दहरमेंजीनामुहालहै
येगुलशन-ए-यक़ींभीब-जुज़वहमकुछनहीं
आलमजिसेकहेंवोतिलिस्म-ए-ख़यालहै
नैरंगी-ए-नज़रकेसिवाऔरकुछनहीं
दूद-ए-फ़िराक़जल्वा-ए-शाम-ए-विसालहै
येनग़्मा-ए-वजूदकिसीरागनीकीराख
इकचीख़साज़-ए-उम्र-ए-अबदकामआ'लहै
हरमौजहैकिहाथसेछुटतीहुईइनाँ
वोजस्त-ओ-ख़ेज़हैकिसँभलनामुहालहै
तपतेदिनोंकीआगमेंजीनेकीआरज़ू
शबनमब-रु-ए-गुलअरक़-ए-इंफ़िआ'लहै
तन्हाइयोंमेंबैठकेख़ुदकोशिकारकर
येदश्त-ए-दिलभीदश्त-ए-ख़ुतनकीमिसालहै