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Sach Shayari
ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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ये सच है कि पाँवों ने बहुत कष्ट उठाए
पर पाँव किसी तरह राहों पे तो आए
Dushyant Kumar
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हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़'
और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
Hafeez Banarasi
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झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो
सरकारी एलान हुआ है सच बोलो
घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है
दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो
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Rahat Indori
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हक़ीक़त कुछ नहीं है सब फ़साने थे फ़साने हैं
उसी पे प्यार आता है उसी से धोखे खाने हैं
Shubham Seth
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तुम मिरी ज़िंदगी हो ये सच है
ज़िंदगी का मगर भरोसा क्या
Bashir Badr
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तू तो सच में ही झूठा निकला यारा
तू तो कहता था हम मिलते रहेंगे
Vicky Kumar Rajak
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दोस्त अपना हक़ अदा करने लगे
बेवफ़ाई हमनवा करने लगे
मेरे घर से एक चिंगारी उठी
पेड़ पत्ते सब हवा करने लगे
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Santosh S Singh
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ख़ुशरंग नज़र आता है जाज़िब नहीं लगता
माहौल मेरे दिल से मुख़ातिब नहीं लगता
मैं भी नहीं हर शे'र में मौजूद ये सच है
ग़ालिब भी हर इक शे'र में ग़ालिब नहीं लगता
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Obaid Azam Azmi
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मुक़ाबिल फ़ासलों से ही मोहब्बत डूब जाएगी
सुनोगी झूठी बातें तुम हक़ीक़त डूब जाएगी
चलेगी तब तलक जब तक तिरी परछाईं देखेगी
तिरा जब हुस्न देखेगी सियासत डूब जाएगी
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Anurag Pandey
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मुझ को भी ज़िद करने का हक़ दो साहब
मेरे भीतर भी इक बच्चा रहता है
Atul K Rai
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ख़ैर सच तो है सच मगर ऐ झूठ
मैं ने तेरा भी ए'तिबार किया
Firaq Gorakhpuri
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अदाकारी बहुत दुख दे रही है
मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूँ
ख़ून भी थूका सच-मुच थूका और ये सब चालाकी थी
Jaun Elia
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हमें अपने घर से चले हुए सर-ए-राह उम्र गुज़र गई
कोई जुस्तुजू का सिला मिला न सफ़र का हक़ ही अदा हुआ
Iqbal Azeem
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जाने कब चुभ जाए आँखों में कोई बे-रहम सच
आइना भी देखने वालो सँभल कर देखना
Meraj Faizabadi
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उन को डर है कि कोई राज़ न खुल जाए कहीं
और मुझ में वो तलब है कि कोई सच न दबे
Haresh Vanza
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मैं बिखर गया तो सँवर गया मेरे मुंसिफ़ो को ये दुख रहा
वही फ़ैसला मेरे हक़ में था जो मेरे ख़िलाफ़ किया गया
Shahid Zaki
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धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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मुझे अब आ गए हैं नफ़रतों के बीज बोने
सो मेरा हक़ ये बनता है कि सरदारी करूँगा
Abdurrahman Wasif
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