इक ये भी है रिवायत बदला लेने की

दिल में रक्खो चाहत बदला लेने की

फ़ौरन सीधे को उल्टा करती हो हर बार
तौबा-तौबा वो आदत बदला लेने की

चूम लिया मैं ने इस
में घबराना क्या
दे दी तुम को इजाज़त बदला लेने की

फिर भी तुम सब को ऐसे ही माफ़ करो
चाहे रक्खो ताक़त बदला लेने की

सारे गुनहगारों को अंदर ले लेगी
दोजख़ से न जन्नत बदला लेने की

— Abuzar kamaal

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