इस भरी दुनिया में कोई भी हमारा न हुआ

ग़ैर तो ग़ैर हैं अपनों का सहारा न हुआ

लोग रो रो के भी इस दुनिया में जी लेते हैं
एक हम हैं कि हँसे भी तो गुज़ारा न हुआ

इक मोहब्बत के सिवा और न कुछ माँगा था
क्या करें ये भी ज़माने को गवारा न हुआ

आसमाँ जितने सितारे हैं तिरी महफ़िल में
अपनी तक़दीर का ही कोई सितारा न हुआ

— Rajendra Krishan

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Kismat Shayari

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