baat saaqi ki na taali jaayegi | बात साक़ी की न टाली जाएगी

  - Sabiha Nasreen

बात साक़ी की न टाली जाएगी
ये ग़ज़ल साँचे में ढाली जाएगी

कर के तौबा आए दिल को जब क़रार
मुहर-ए-शीशा तोड़ डाली जाएगी

जब नक़ाब-ए-रुख़ हटा ली जाएगी
सुब्ह होगी रात काली जाएगी

कहकशाँ है रिफ़अ'तों में वाज़गूँ
उस तरफ़ क्यों तब्अ'-ए-आली जाएगी

पान खाते हैं तो वो करते हैं क़त्ल
कब भला होंटों से लाली जाएगी

बाग़बाँ आमादा-ए-पैकार है
ये सबद गुलचीं की ख़ाली जाएगी

दस्तक-ए-नामूस का है ये शुऊ'र
दर पे दिलबर के न टाली जाएगी

मेहमाँ आली-तबीअ'त है बहुत
ख़्वान में सोने की थाली जाएगी

ग़म न कर 'नसरीं' तिरी कश्ती ज़रूर
शोख़ मौजों से निकाली जाएगी

  - Sabiha Nasreen

Mehboob Shayari

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