तुम ने इतना भुला दिया हम को
जब भी चाहा रुला दिया हम को
नींद तो ख़ैर आ नहीं सकती
प्यार का जो सिला दिया हम को
ख़्वाब झूटे बड़े ही, सच्चे थे
ख़्वा-मख़्वाह क्यूँ जगा दिया हम को
आप ऐसा कभी करोगे नईं
वक़्त ने ही दग़ा दिया हम को
चाहता हूँ जिसे बहुत ज़्यादा
ख़ाक में ही मिला दिया हम को
— Sandeep Gandhi Nehal















