badhti rahi har saal jo taadaad hamaari | बढ़ती रही हर साल जो तादाद हमारी

  - Sarfaraz Shahid

बढ़ती रही हर साल जो तादाद हमारी
क्या याद करेगी हमें औलाद हमारी

डिस्को के मुग़न्नी की झलक देख के मजनूँ
चीख़ा कि मदद कीजिए उस्ताद हमारी

मशरिक़ से तअल्लुक़ है न मग़रिब से कनेक्शन
फ़ैशन ने हिला डाली है बुनियाद हमारी

शीरीं को बना रक्खा है दफ़्तर का स्टेनो
तक़लीद करेगा कोई फ़रहाद हमारी

हम ने तो उन्हें जामिआ से नक़्द ख़रीदा
फिर किस तरह जाली हुईं अस्नाद हमारी

जिस रोज़ से मेम्बर वो कमेटी का हुआ है
सुनता नहीं रूदाद करम-दाद हमारी

जिस वक़्त भी वो आलमी नैट ऑन करेगा
ईमेल दिला देगी उसे याद हमारी

  - Sarfaraz Shahid

Promise Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Sarfaraz Shahid

As you were reading Shayari by Sarfaraz Shahid

Similar Writers

our suggestion based on Sarfaraz Shahid

Similar Moods

As you were reading Promise Shayari Shayari