फिर से वही जो कुछ रवानी चाहिए
क्या बात है की शब जलानी चाहिए
लग कर गिरे है उस के होंठों से सुनो
मुझ को वही सो रग पुरानी चाहिए
कोई नई बातें नहीं अब यार वो
इक जिस्म को फिर से जवानी चाहिए
मैं जो किसी से कह नहीं पा'ता अदू
क्या अब दिवारों से छुपा'नी चाहिए
— Shiv















