इकअनोखीरस्मकोज़िंदारखाहै
ख़ूनहीनेख़ूनकोपसपारखाहै
अबजुनून-ए-ख़ुद-नुमाईमेंतोहमने
वहशतोंकाइकदरीचावारखाहै
शहरकैसेअबहक़ीक़त-आश्नाहो
आगहीपरज़ातकापहरारखाहै
तीरगीकीक्याअजबतरकीबहैये
अबहवाकेदोशपरदीवारखाहै
तुमचराग़ोंकोबुझानेपरतुलेहो
हमनेसूरजकोभीअबअपनारखाहै
तुमहमारेख़ूनकीक़ीमतनपूछो
इसमेंअपनेज़र्फ़काअर्सारखाहै
शहरकीइसभीड़मेंचलतोरहाहूँ
ज़ेहनमेंपरगाँवकानक़्शारखाहै
ये'अज़ीम'अपनाकमाल-ए-ज़र्फ़हैजो
दुश्मनोंकेऐबपरपर्दारखाहै