मेरी नज़रों में वो तर गया है
ख़ूनी का ख़ून जो कर गया है
जिस्म की भूख बस अब बची है
प्यार का भूत तो मर गया है
जा मिला तब समुंदर को शातिर
शहर जब पूरा बस भर गया है
छत को पक्की बनाने हो वाले
तू भी कच्ची से बस डर गया है
पूछो मत इश्क़ की तुम तबीयत
चार कंधों में वो घर गया है
बस ख़बर आई उस के ही हिस्से
बेटा था जिस का भी मर गया है
— Abhishek Baba















