मैं आदत से बीमार लगने लगा था
किसी का मैं अब प्यार लगने लगा था
जिसे घर बसाना था जानें ये फिर क्यूँ
मैं उस को भी दीवार लगने लगा था
मेरी दुश्मनी की हदें देख कर अब
मैं दुश्मन को भी यार लगने लगा था
रहा उन के झगड़े पे मैं चुप हमेशा
सो उन को तरफदार लगने लगा था
तवज्जोह ने मेरी बिगाड़ा था शायद
जो लड़का समझदार लगने लगा था
— Vivek Chaturvedi















