ऐख़ुदाऐख़ुदा
मैंहूँमसरूफ़-ए-तस्बीह-ओ-हम्द-ओ-सना
गोब-ज़ाहिरइबादतकीआदतनहींहै
रिंद-मशरबहूँज़ोहद-ओ-रियाज़तसेरग़बतनहींहै
मगरजबभीचलताहैमेराक़लम
जबभीखुलतीहैमेरीज़बाँ
कुछकहूँकुछलिखूँ
तेरीतख़्लीक़काज़मज़मामुद्दआमुंतहा
हर्फ़जुड़करबनेंलफ़्ज़तोकरतेहैंतेरीहम्द-ओ-सना
याख़ुदायाख़ुदा
मेरेअतराफ़हैंपेटख़ालीबदन-ए-नीम-जाँ
कोईतकताहैजबमेरादस्त-ए-तही
शर्मआतीहैमुझकोख़ुदा-ए-ग़नी
सोचताहूँमैंअपनीज़बाँरेहनरखदूँकहीं
रिज़्क़सेख़ालीपेटोंकोभरदूँ
जोहैंनीम-जाँउनमेंजानफूँकदूँ
औरअपनेलिएथोड़ीआसाइशेंमोललेआऊँबाज़ारसे
अपनेबच्चोंकीज़िदपूरीकरदूँ
जोवाक़िफ़नहींहैंमईशतकेअंदाज़-ओ-रफ़्तारसे
फिरयहीसोचताहूँ
ख़ुदाऐख़ुदा
क्याज़बाँरेहनहोकरभीतेरीइता'अतकरेगी
क्याक़लमबिककेभीनामतेराहीलेगा
दूसरोंकोख़ुदामानकर
वोनकरनेलगेंमा-सिवाकीभीहम्द-ओ-सना
ऐख़ुदाऐख़ुदाहैदु'आ
आख़िरीसाँसतक
येक़लमयेज़बाँ
लिखतेरहतेहैंला-इलाहा