हाथों से उस की ज़हर पि
यूँ ये है आरज़ू
मिल जाए ज़िन्दगी को सुकूँ ये है आरज़ू
दिल की रगों को अपने सलीक़े से खींच कर
उस से ही ज़ख़्म-ए-दिल को सि
यूँ ये है आरज़ू
साक़ी पिलाए जाम मेरी आरज़ू नहीं
साक़ी के साथ जाम पि
यूँ ये है आरज़ू
सारे गुलाब अपने क़लम में निचोड़ कर
होंठों पे उस के शे'र लिखूँ ये है आरज़ू
— Abid aseer















