qismat ke daanv par yahan kiska hai bas chala | क़िस्मत के दाँव पर यहाँ किसका है बस चला

  - Amaan Pathan

क़िस्मत के दाँव पर यहाँ किसका है बस चला
मैं बच गया था दूध से पर छाछ से जला

तुम प्यार चाहते हो ज़माने से भूल है
शायर कोई भला कभी महलों में है पला

दुनिया पे से यक़ीन मिरा उठ गया था जब
इक शख़्स ने मुझे बड़ी तरतीब से छला

बरसों से जो सँभाल के रक्खा था एक ख़्वाब
मलबे के नीचे दब गया जब आया ज़लज़ला

वो बीच ज़लज़ले के उसे ढूँढने में गुम
बेटा नहीं रहा ये बाद में पता चला

अब तो अमान होने लगा है यक़ीन ये
उसके ही हक़ में आएगा मुन्सिफ़ का फ़ैसला

  - Amaan Pathan

Yaad Shayari

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