किसी का दोस्त मोहब्बत पे इख़्तियार नहीं
ये सच है मेरे लिए उस के दिल में प्यार नहीं
कभी कभी ही मोहब्बत की बात करता है
है गुल पे बैठती तितली हर एक बार नहीं
मैं दोस्त इस लिए भी थोड़ा कम नुकीला हूँ
है जाना दिल में मुझे दिल के आर-पार नहीं
मुझे भी सबकी तरह एक शख़्स चाहिए बस
इक ऐसा जो कभी मुझ से हो सोगवार नहीं
हम एक साथ रहे दो दशक बने लम्हें
वो लम्हें ऐसे मगर जो कि यादगार नहीं
— Ayush Aavart















