कहकहे,ख़्वाब,अरमान रख दीजिए
दुख बनाने का सामान रख दीजिए
बर-तरफ़ अपना इमान रख दीजिए
हो न पाए तो मीज़ान रख दीजिए
हम ग़ज़लगो भी हैं तो रिवायत के हैं
तश्तरी में भी कुछ पान रख दीजिए
मेरा क़िस्सा हैं इक नज़्म की शक्ल में
इस का उनवाँ,"बे-उन्वान"रख दीजिए
यक बदन सोग में मर्सिया गा रहा
मेरी आँखों प ही कान रख दीजिए
अब जो है कोहकन की तरह है बदन
अब तो रस्ते में चट्टान रख दीजिए
नइ रखे जा रहे हाथ पे हाथ क्या
गुफ़्तगू के ही दौरान रख दीजिए
ज़िक्र मेरा कभी कीजिए दफ़अतन
और' रक़ीबों को हैरान रख दीजिए
संग होता कोई आपके काम का
ये तो दिल है मेरी जान, रख दीजिए
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