सुकूँ की ज़िन्दगी चाहो ये जुर्रत तुम नहीं करना

सभी कुछ कर गुज़रना पर मुहब्बत तुम नहीं करना

किसी के चैन की ख़ातिर किसी बेचैन की ख़ातिर
जहाँ बेचैन करने की हिमाक़त तुम नहीं करना

सियासत के उसूलों की जमा बतला रहा हूँ मैं
अगर हो हुक्मराँ ख़ालिस बग़ावत तुम नहीं करना

जहाँ को जीतने का इक वज़ीफा याद कर लो तुम
किसी कमज़ोर इंसाँ से अदावत तुम नहीं करना

— Talib akbarabadi

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