मुझे जहान के इस फ़लसफ़े से दिक्कत है,
मुझे ख़ुदा को ख़ुदा मानने से दिक्कत है
ये हार जीत तो चलती रहेगी दुनिया में,
बग़ैर खेले मुझे हारने से दिक्कत है
हुकूमतों के वफ़ादार वो ही होते हैं,
चला के अक्ल जिन्हे सोचने से दिक्कत है
शब-ए-फ़िराक़ का उस को नहीं हुआ था ग़म
उसे तो यार फ़क़त लौटने से दिक्कत है
हँसी-मज़ाक में वो हुक्म तो चलाते हैं,
पर अपने आप पे इक चुटकुले से दिक्कत है
— Maher painter 'Musavvir'















