चलेगी साँस, जब तक दम रहेगा
तिरे जाने का दिल में ग़म रहेगा
तबस्सुम अब न ठहरेगा लबों पर
ये चेहरा आँसुओं से नम रहेगा
न टूटेगा तसलसुल दर्द-ओ-ग़म का
बहुत, थोड़ा, ज़्यादा, कम रहेगा
मोहब्बत में गुलाबी जो बदन था
वो ज़हरे-हिज्र से नीलम रहेगा
हमारा वस्ल तो मुमकिन नहीं अब
ये ख़्वाबो-अश्क का संगम रहेगा
कोई रुत हो बदल जाएगी इक दिन
उदासी का मगर मौसम रहेगा
— Qambar Naqvi















