हूँ तेरी साँसों की दरकार राएगाँ न समझ
दरख़्त मैं हूँ हवा-दार राएगाँ न समझ
न ऊब दोस्त सुकूँ की लुका-छुपी से अभी
है खेल ख़ूब मज़ेदार राएगाँ न समझ
जुनून-ए-इश्क़ को समझे है राएगाँ दुनिया
ख़ुदारा तू तो मेरे यार राएगाँ न समझ
क़ुसूर-वार हैं हम ग़लतियाँ हमारी थीं
तू ख़ुद को बीच की दीवार राएगाँ न समझ
— Dipanshu Shams















