अगर न होता खारा सागर
फिर नदियों सा भाता सागर
हम दोनों का मेल ही क्या है
एक नदी है दूजा सागर
अश्कों को कतरा मत समझो
इन
में डूबा गहरा सागर
मेरी ग़ज़लो को है समझा
इक चंदन और दूजा सागर
— Manoj Sharma "Chandan"
फिर नदियों सा भाता सागर
हम दोनों का मेल ही क्या है
एक नदी है दूजा सागर
अश्कों को कतरा मत समझो
इन
में डूबा गहरा सागर
मेरी ग़ज़लो को है समझा
इक चंदन और दूजा सागर
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