सभी को अपना दीवाना बना लेना
किसी दिन मुझ को सिरहाना बना लेना
हक़ीक़त मैं बना लूँगा तुम्हें अपनी
मुझे तुम अपना अफ़साना बना लेना
वफ़ा के नाम पर तुम क़त्ल करना सब
छिपाने लाश बुत-ख़ाना बना लेना
— SIDDHARTH SHARMA
किसी दिन मुझ को सिरहाना बना लेना
हक़ीक़त मैं बना लूँगा तुम्हें अपनी
मुझे तुम अपना अफ़साना बना लेना
वफ़ा के नाम पर तुम क़त्ल करना सब
छिपाने लाश बुत-ख़ाना बना लेना
Other ghazal from the same pen
Shers of wafa.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling