थाम लो हाथ किधर जाऊँगा
टूट पाया तो बिखर जाऊँगा
ये मेरा डर है कि तेरे दिल से
मैं किसी दिन को उतर जाऊँगा
इक नज़र फेर मेरी और ज़रा
देख मैं कल से सुधर जाऊँगा
इश्क़ में हद तो नहीं होती पर
एक दिन हद से गुज़र जाऊँगा
— Subodh Sharma "Subh"
टूट पाया तो बिखर जाऊँगा
ये मेरा डर है कि तेरे दिल से
मैं किसी दिन को उतर जाऊँगा
इक नज़र फेर मेरी और ज़रा
देख मैं कल से सुधर जाऊँगा
इश्क़ में हद तो नहीं होती पर
एक दिन हद से गुज़र जाऊँगा
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