बेकली, तग़ाफुल और बेबसी ज़रूरी है

इश्क़ करने से पहले बेरुखी ज़रूरी है

एक रात के फांके ने सिखा दिया मुझ को
प्यार व्यार से ज़्यादा नौकरी ज़रूरी है

दर्द ओ ग़म ये कहता है ख़ुद-कुशी करी जाए
ज़िम्मेदारी कहती है ज़िन्दगी ज़रूरी है

ज़िन्दगी में मेरी तुम ऐसे ही ज़रूरी हो
रिन्द के लिए जैसे मयकशी ज़रूरी है

तोहमतों से बढ़कर ज़ब बात अना पे आ जाए
ऐसे मामलों में फिर सरकशी ज़रूरी है

सिर्फ़ अक्ल ओ मेहनत से कोई बढ़ नहीं सकता
हासिल ए तरक्की को पैरवी ज़रूरी है

— Mohammad Aquib Khan

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